मछुआरों/मत्स्य कृषकों के लिए आपदा राहत सहायता योजना बिहार

आपदा से प्रभावित मछुआरों/मत्स्य कृषकों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार और बिहार सरकार के द्वारा मत्स्य आपदा राहत योजना बिहार के अंतर्गत आर्थिक सहायता दिया जाता है

घटक इकाई लागत

नाव/जाल की मरम्मत / प्रतिस्थापन के लिए मछुआरों को सहायता, क्षतिग्रस्त या खोई हुई

  • नाव।
  • डोंगी-डोंगी।
  • कैटमरैन।
  • जाल।

(यदि लाभार्थी ने आपदा के लिए या  किसी अन्य सरकारी योजना के तहत किसी भी सब्सिडी/सहायता का लाभ उठाया या सहायता के पात्र होने की स्थिति में यह लाभ नहीं दिया जाएगा।)

  • ₹ 4,100/- आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त नाव की मरम्मत के लिए।
  • ₹2,100/- आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त जाल की मरम्मत के लिए।
  • ₹ 9,600/- पूरी तरह से क्षतिग्रस्त नौकाओं के प्रतिस्थापन के लिए
  • ₹ 2,600/- पूरी तरह से क्षतिग्रस्त जाल के प्रतिस्थापन के लिए।

क्षतिग्रस्त मत्स्य बीज फार्म के लिए इनपुट सब्सिडी

  • 8,200/-प्रति हे0
मछली फार्मों की डीसिल्टिंग/पुनर्स्थापना/मरम्मति
  • ₹ 12,200/- प्रति हे0

(बशर्ते कि किसी सरकार के किसी अन्य योजना द्वारा सहायता पाने योग्य न हो या सहायता/सब्सिडी न प्राप्त कर लिया हो।)

आपदा प्रबंधन विभाग के द्वारा ऊपर दिए गए निर्धारित सहायता राशि करने हेतु मानक संचालन प्रक्रिया है जो निम्नलिखित है:

बाढ़ से हुए क्षति का आकलन एवं पारदर्शी जाँच कराने हेतु जिला मत्स्य पदाधिकारी मत्स्य कृषकों द्वारा उपयोग किये जाने वाले नाव/जाल की सूची तैयार करेंगे, जिसे प्रत्येक वर्ष 15 जून तक अपडेट कर लिया जाएगा। इसी प्रकार जिला मत्स्य पदाधिकारी द्वारा मछली जीरा फार्म/हैचरी एवं मछली फार्म (तालाब इत्यादि) का अंचलवार/पंचायतवार/कृषकवार विवरण तैयार कर कार्यालय में संधारित किया जाएगा, जिसमें फार्म/ तालाब की संख्या एवं रकवा स्पष्ट रूप से अंकित होगा।

जिला मत्स्य पदाधिकारी मछली जीरा फार्म में मछली जीरा के संचयन के वास्तविक स्थिति/को भी अपडेट करते रहेंगे, जिससे यह पता चले कि फार्म के बाढ़ से प्रभावित होने के पूर्व मछली जीरा का संचयन किया गया था कि नहीं।

मत्स्य आपदा राहत सहायता योजना बिहार में बाढ़ से हुई क्षति का प्रारंभिक आकलन:

समाहर्ता द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मात्स्यिकी से संबंधित हुए क्षति का त्वरित प्रारंभिक आकलन अंचल अधिकारी के माध्यम से कराया जाएगा। क्षति के प्रांरभिक आकलन हेतु जिला मत्स्य पदाधिकारी के द्वारा संधारित नाव/जाल/मछली जीरा फार्म/मछली फार्म से संबंधित अद्यतन सूचना को आधार बनाया जा सकेगा।

मछली जीरा फार्म हेतु इनपुट अनुदान जीरा का संचयन किये जाने और उक्त फार्म में बाढ़ के पानी प्रवेश करने पर ही अनुमान्य होगा।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में मछली फार्म के डीसिल्टेशन/पुनर्स्थापना/मरम्मति हेतु सहाय्य अनुदान बांध की क्षति होने अथवा तालाब में सील्टेशन होने पर ही अनुमान्य होगा।

मछली पालन योजना बिहार हेतु ऑनलाइन पंजीकरण

बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में मत्स्य प्रक्षेत्र में हुए क्षति का प्रारंभिक आकलन कराकर समाहर्ता के द्वारा आपदा प्रबंधन विभाग को प्रतिवेदित किया जाएगा, जिसकी एक प्रति पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग को दी जाएगी।

मत्स्य आपदा राहत सहायता योजना के लिए दस्तावेज :

  • क्षतिग्रस्त स्थल/क्षतिग्रस्त का फोटो
  • बैंक पासबुक की छायाप्रति
  • भू-स्वामित्व प्रमाण पत्र/लगान रसीद की छायाप्रति
  • आधार कार्ड की छायाप्रति
  • बीज/जीरा संचयन संबंधी साक्ष्यः

मत्स्य आपदा राहत सहायता योजना बिहार आवेदन प्राप्ति की प्रक्रिया :

क्षतिपूर्ति दावा हेतु मत्स्य कृषकों के द्वारा संबंधित जिला मत्स्य कार्यालय अथवा संबंधित अंचल कार्यालय में विहित प्रपत्र-I में निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन समर्पित किया जाएगा। जिला मत्स्य कार्यालय में प्राप्त होने वाले आवेदनों को दो दिनों के भीतर जिला मत्स्य पदाधिकारी जाँच हेतु संबंधित अंचल के अंचलाधिकारी को प्रेषित करेंगे।

आवेदन के साथ फार्म का फोटोग्राफ/क्षतिग्रस्त नाव/जाल का फोटोग्राफ संलग्न करना अनिवार्य होगा।

प्राप्त आवेदनों को जिला मत्स्य कार्यालय/अंचल कार्यलय में आवेदन पंजी में संधारित किया ‘जाएगा। आवेदनों के संधारण में पूर्ण पारदर्शिता बरती जाएगी एवं इसका दैनिक प्रतिवेदन समाहर्ता को प्रेषित किया जाएगा।

आवेदनों के सत्यापन/जाँच की प्रक्रिया : –

संबंधित अंचलाधिकारी स्वयं अथवा उनके द्वारा प्राधिकृत पदाधिकारी/कर्मचारी के द्वारा 07 दिनों के अन्दर प्राप्त आवेदनों की जाँच कर, कारण सहित स्वीकृति/आंशिक स्वीकृति/अस्वीकृति की अनुशंसा के साथ जिला मत्स्य पदाधिकारी को अग्रसारित करेंगे।

राज्य के पाँच जिलों यथा मुजफ्फरपुर, पूर्वी चम्पारण, प0 चम्पारण, दरभंगा एवं मधुबनी में प्रखण्ड स्तरीय कार्यरत मत्स्य प्रसार पदाधिकारियों को इस कार्य हेतु प्राधिकृत किया जा सकेगा।

जाँच के क्रम में नाव एवं जाल के आंशिक/पूर्ण क्षति के बारे में स्पष्ट मंतव्य जाँच पदाधिकारी के द्वारा अंकित किया जाएगा। मत्स्य बीज फार्म के इनपुट अनुदान दावा हेतु प्राप्त आवेदनों में दर्ज सूचनाओं की संपुष्टि हेतु कृषक द्वारा उपलब्ध कराए गए विपत्र/कागजात को भी आधार बनाया जाएगा।

मछली फार्म के क्षति की जाँच में जाँच पदाधिकारी द्वारा फार्मों के बांध की क्षति अथवा फार्म में हुए सील्टेशन के बारे में स्पष्ट रूप से प्रतिवेदित किया जाएगा।

जाँच पदाधिकारी/प्राधिकृत कर्मी द्वारा प्रभावित फार्म के इर्द-गिर्द के दो कृषकों की गवाही द्वीस भी आवेदन में दर्ज दावा का सत्यापन किया जाएगा।

वास्तविक मत्स्य पालन करने वाले सरकारी जलकरों के पट्टेदार और निजी क्षेत्रों के तालाबों में वास्तविक मालिक/जोतदार को ही लाभ मिले, इसे सुनिश्चित किया जाएगा।

 आवेदनों की स्वीकृति –

अंचलाधिकारी स्वंय अथवा उनके द्वारा प्राधिकृत पदाधिकारी/कर्मचारी एक सप्ताह के भीतर स्थल पर जाकर जाँच कर प्रतिवेदन प्रपत्र-II में अंचलाधिकारी को समर्पित करेंगे। अंचलाधिकारी अपने स्तर से संतुष्ट होकर इसे प्रतिहस्ताक्षरित कर जिला मत्स्य पदाधिकारी को प्रेषित करेंगे।

जिला मत्स्य पदाधिकारी के द्वारा अंचलों से प्राप्त न्यूनतम 15 प्रतिशत आवेदनों की जाँच स्वंय की जाएगी। प्रपत्र-III में जिला मत्स्य पदाधिकारी के द्वारा क्षतिपूर्ति के अनुमोदन हेतु अनुशंसा की जाएगी। तदोपरांत प्राप्त क्षतिपूर्ति की स्वीकृति प्रपत्र-IV में संकलित कर जिला मत्स्य पदाधिकारी द्वारा अपर समाहर्ता को प्रस्तुत किया जाएगा।

अपर समाहर्ता एक सप्ताह के भीतर उक्त क्षतिपूर्ति की स्वीकृति करेंगे। समाहर्ता के द्वारा लाभुक को DBT/RTGS के माध्यम से अधिकतम तीन दिनों में क्षतिपूर्ति का भुगतान कर दिया जाएगा।

अनुश्रवण :

बाढ़ से हुई क्षति के त्वरित आकलन एवं क्षतिपूर्ति हेतु आवेदन की प्राप्ति एवं उसके शीघ्र पारदर्शी सत्यापन कराने हेतु इसका प्रभावकारी अनुश्रवण किया जाएगा।

अंचल अधिकारी के द्वारा आवेदन के सत्यापन की पूरी प्रक्रिया का क्षेत्र भ्रमण कर क्रॉस सत्यापन किया जाएगा, ताकि सत्यापन कार्य में किसी प्रकार की गड़बड़ी/त्रुटि न हो।

जिला मत्स्य पदाधिकारी जिलान्तर्गत प्रभावित क्षेत्रों का सतत् क्षेत्र भ्रमण कर सत्यापन कार्य का निरीक्षण करेंगे। किसी प्रकार की त्रुटि/गड़बड़ी परिलक्षित होने पर जिला मत्स्य पदाधिकारी द्वारा संबंधित अंचल अधिकारी एवं समाहर्ता को सूचित किया जाएगा एवं तद्नुसार सुधारात्मक कार्रवाई हेतु निदेश समाहर्ता के स्तर से निर्गत किया जाएगा।

प्रभावित परिक्षेत्र के उप मत्स्य निदेशक के द्वारा भी नियमित रूप से क्षेत्राधीन जिलों का भ्रमण कर पर्यवेक्षण किया जाएगा ।

समाहर्ता के द्वारा प्रखण्ड के प्रभारी पदाधिकारी/वरीय पदाधिकारी के द्वारा भी आवेदनों की जाँच की प्रकिया का पर्यवेक्षण कराया जाएगा।

मत्स्य निदेशालय के द्वारा सहाय्य की पूरी प्रक्रिया पर सतत् निगरानी रखी जाएगी। बाढ़ प्रभावित जिलों में सहाय्य की कार्रवाई ससमय संपन्न हो, इसे लगातार समीक्षा कर सुनिश्चित कराया जाएगा।

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