फुटवियर डिजाइनर कैसे बनें? और फुटवियर (footwear) डिजाइनिंग कोर्स कैसे करें?

फुटवियर डिजाइनिंग कोर्स : हम जब बाजार में अपने लिए जूते या फुटवियर से जुड़े कोई भी सामान खरीदने जाते हैं तो फुटवियर की दुकानों पर सजे एक से एक डिजाइन वाले और रंग-बिरंगे जूते-चप्पल, सैंडल्स देख कर हमारी आंखें चौंधिया जाती हैं। यह जल्द फैसला नहीं कर पाते कि इन सब में बेहतर कौन सा है। हमारे लिए कौन वाला अच्छा रहेगा। हालांकि हम यहां बात केवल फुटवियर डिजाइन्स के बारे में नहीं करेंगे बल्कि इसे आप कैसे डिजाइन कर सकें और फुटवियर की दुनिया में अपना नाम कैसे बना सकें, इस बारे में हम आपको पुरी जानकारी देंगे। तो आइए सबसे पहले यह जान लेते हैं कि फूटवियर डिजाइनर बनने के लिए शैक्षणिक योग्यता क्या होनी चाहिए।

रोज तैयार होते हजारों फुटवियर डिजाइंस

हमारे पूर्वजों के जमाने में फुटवियर केवल लेदर यानी चमड़े से ही बनाए जाते थे, लेकिन बदलते समय के साथ फुटवियर की दुनिया ने काफी तरक्की की। अब प्लास्टिक, जूट, रबड, यहां तक की कपड़े से भी फुटवियर बनाए जाने लगे हैं। हालांकि लाखों डिजाइंस तैयार होने के बावजूद यह इंडस्ट्री लोगों को मांग पूरी नहीं कर पा रही है। यहीं कारण है कि इस फुटवियर डिजाइनिंग क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं सौ फीसदी हैं।

10+2 पास होना है जरूरी

इस फुटवियर के क्षेत्र में कदम रखने के लिए कम से कम 12th पास होना चाहिए और कंप्यूटर की बेसिक जानकारी होना जरूरी है। किसी भी विषय से इंटर पास छात्र फूटवियर डिजाइनिंग कोर्स कर सकते हैं और फुटवियर डिजाइनर बन अपने लिए रोजगार का अवसर बना सकते हैं। हम यहां अवसर की बात इसलिए कर रहे हैं क्योंकि भारत फुटवियर मैन्युफैक्चरिंग में चीन के बाद दुनिया में दूसरे नंबर पर है। हमेशा आकर्षक और प्रभावशाली दिखते रहने चाहने वाले भारतीयों में स्टाइलिश फुटवियर के प्रति एक अलग ही क्रेज है। तो आइए जान लेते हैं कि आपकी क्रिएटिविटी फुटवियर मार्केट की शान कैसे बन सकती है।

फुटवियर डिजाइनिंग कोर्स
फुटवियर डिजाइनिंग कोर्स

फुटवियर डिजाइनिंग कोर्स

12th करने के बाद आप फुटवियर डिजाइनिंग के कोर्स में अंडर ग्रेजुएट, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स कर सकते हैं। फुटवियर डिजाइनिंग में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा करने के लिए किसी भी संकाय से  ग्रेजुएशन होना आवश्यक है। यह कोर्स एक साल से लेकर तीन साल तक की होती हैं

इस फुटवियर डिजाइनिंग कोर्स के दौरान छात्रों को जूते बनाने वाले मैटीरियल, पैटर्न, डिजाइन कॉन्सेप्ट, डिजाइन सॉफ्टवेयर व फैशन टेंडस आदि की विस्तृत जानकारी दी जाती है।

  • सर्टिफिकेट कोर्स इन शू डिजाइनिंग एंड पैटर्न कटिंग
  • डिप्लोमा इन फुटवियर डिजाइनिंग एंड प्रोडक्शन
  • डिप्लोमा इन लेदर गुड्स एंड एक्सेसरीज डिजाइन
  • Diploma इन फुटवियर टेक्नोलॉजी
  • बैचलर ऑफलेदर डिजाइन
  • बीटेक इन फुटवियर टेक्नोलॉजी
  • सर्टिफिकेट कोर्स इन फुटवियर डिजाइन एंड प्रोडक्शन

प्रमुख फुटवियर डिजाइनिंग कोर्स संस्थान

फुटवियर डिजाइन ऐंड डेवलॅपमेंट इंस्टीटयूट (एफडीडीआई)

आपके जानकारी के लिए बता दू कि अकेले फुटवियर डिजाइन ऐंड डेवलॅपमेंट इंस्टीटयूट (एफडीडीआई) के देश भर में 12 कैंपस हैं, जिनमें स्कूल ऑफ फुटवियर, स्कूल ऑफ रीटेल, स्कूल ऑफ लेदर गुड्स एवं स्कूल ऑफ फैशन डिजाइन संचालित होते हैं। आप इन संस्थानों से फुटवियर डिजाइन एवं प्रोडक्शन, लेदर गुड्स एवं एसेसरीज डिजाइन,फैशन डिजाइन में चार वर्षीय बैचलर ऑफ डिजाइन (बीडेस), रीटेल एवं फैशन मर्चेडाइज में तीन वर्षीय बैचलर ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन (बीबीए-आरएफएम) कोर्स कर सकते हैं। वहीं मास्टर डिग्री प्रोग्राम के लिए एफडीडीआइ के कई कैंपस में फुटवियर डिजाइन एवं प्रोडक्शन में मास्टर ऑफ डिजाइन (एमडेस-एफडीपी), रीटेल एवं फैशन मर्चेडाइज में एमबीए करने का भी विकल्प उपलब्ध है।

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इस बार फुटवियर डिजाइन एवं प्रोडक्शन में बीडेस प्रोग्राम की कुल 900 सीटें हैं, जिनमें नोएडा, फुरसतगंज, चेन्नई, कोलकाता, रोहतक, जोधपुर, छिंदवाड़ा, गुना, अंकलेश्वर, पटना, हैदराबाद एवं चंडीगढ़ कैंपस में क्रमशः 75-75 सीटें शामिल हैं। वहीं, बीडेस फैशन डिजाइन की गुना कैंपस को छोड़कर बाकी 11 कैंपस में कुल 660 सीटों यानी लगभग 60-60 सीटों में प्रवेश दिया जायेगा। नोएडा, पटना, हैदराबाद एवं चंडीगढ़ कैंपस में बीबीए एवं एमबीए की 240 एवं एमडेस की नोएडा एवं चेन्नई कैंपस में 150 सीटें हैं। लेदर गुड्स एवं एसेसरीज डिजाइन के बीडेस प्रोग्राम में नोएडा, कोलकाता, हैदराबाद कैंपस की कुल 180 सीटों में प्रवेश दिया जायेगा।

फुटवियर डिजाइनर आवेदन के लिए जरूरी योग्यता

आप इनमें से किसी भी संस्थान में अपने लिए फुटवियर कोर्स का चयन कर सकते हैं। बस बीडेस एवं बीबीए प्रोग्राम में प्रवेश के लिए अभ्यर्थी के पास किसी मान्यताप्राप्त बोर्ड से किसी भी विषय में 12वीं का सर्टिफिकेट और फुटवियर डिजाइन एवं प्रोडक्शन, लेदर गुड्स, डिजाइन, फैशन, फाइन आर्ट्स, आर्किटेक्चर, इंजीनियरिंग, प्रोडक्शन, टेक्नोलॉजी में बैचलर डिग्री होने चाहिए। वहीं एमबीए (रिटेल एंड फैशन मर्चेडाइज) में किसी भी विषय में बैचलर डिग्री की योग्यता रखनेवाले प्रवेश ले सकते हैं। इसके साथ ही अभ्यर्थी की आयु 1 जुलाई, 2021 को 25 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए.मास्टर कोर्स में प्रवेश के लिए कोई आयु सीमा नहीं है।

फुटवियर डिजाइनिंग प्रवेश परीक्षा

अभ्यर्थी को बैचलर एवं मास्टर कोर्स दोनों में प्रवेश के लिए ऑल इंडिया सलेक्शन टेस्ट (एआइएसटी) देना होगा। इस टेस्ट के माध्यम से छात्रों की जानकारी, कौशल एवं योग्यता का आंकलन किया जायेगा। इसमें सफल होने के बाद ही आपको अपनी पसंद के कोर्स एवं कैंपस में एडमिशन मिल सकता है। एआइएसटी पेपर बेस्ड टेस्ट (पीबीटी) होगा। इस टेस्ट का आयोजन देश के 31 शहरों में किया जाता है। इन शहरों में पटना, रांची, जमशेदपुर, कोलकाता भी शामिल हैं।

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टेस्ट का पाठ्यक्रम एवं पैटर्न

बैचलर प्रोगम में प्रवेश के लिए आयोजित टेस्ट में कुल 200 अंक के 150 प्रश्न पूछे जायेंगे। पेपर में चार सेक्शन होंगे। सेक्शन-ए में क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड, बी में वर्बल एबिलिटी (कॉम्प्रिहेंशन, ग्रामर आदि), सी में जनरल अवेयरनेस और डी में बिजनेस एवं एप्टीट्यूड टेस्ट पर आधारित प्रश्न पूछे जायेंगे। एमडेस एवं एमबीए के लिए भी अधिकतम 200 अंक का टेस्ट होगा, जिसमें 175 प्रश्न होंगे। इसमें सेक्शन-ए में क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड, बी में इंग्लिश कॉम्प्रिहेंशन, सी में जनरल नॉलेज एवं करेंट अफेयर्स और डी में मैनेजमेंट एप्टीट्यूड टेस्ट एवं एनालिटिकल एबिलिटी पर केंद्रित प्रश्न होंगे।

फुटवियर डिजाइनिंग में यहां पा सकते हैं नौकरी

फुटवियर डिजाइंनिंग कोर्स करने के बाद आपके पास स्कोप ही स्कोप है। फुटवियर से जुड़े कई रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा ग्लोबल मंदी के बावजूद एफडीडीआई इंस्टीटयूट के स्टूडेंट्स को अच्छी कंपनियों में नौकरियां मिली हैं। इसका कारण यह है कि यूरोप और अमेरिका की बडी फुटवियर कंपनियां अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स भारत और चीन में शिफ्ट कर रही हैं, क्योंकि भारत में रॉ मैटीरियल की कोई कमी नहीं है। अकेले भारत की घरेलू फुटवियर इंडस्ट्री लगभग 320 करोड़ डॉलर मतलब 23,615 करोड़ रुपये की है और यह सालाना 11-12 फीसदी की दर से बढ़ रही है।

वैश्विक फुटवियर उत्पादन का 13 फीसदी भारत में होता है। भारत में चमड़े के करीब 90.9 करोड़ जोड़ी जूते और गैर चमड़े के करीब 105.6 करोड़ जूते सालाना बनते हैं। इसके अलावा 10 करोड़ चमड़े के जूते के टुकड़े तैयार किये जाते हैं यानी देश में करीब 206.5 करोड़ जोड़ी जूते निर्मित होते हैं और यहां से तकरीब 11.5 करोड़ फुटवियर का निर्यात होता है। भारत में बाटा, लखानी, खादिम, एक्शन, सुपरहाउस और लिबर्टी जैसी देशी कंपनियों के साथ नाइक, रिबॉक, वुडलैंड, ली-कूपर जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियां फुटवियर को नया और खूबसूरत लुक देने का काम कर रही हैं। साथ ही साथ युवाओं को रोजगार के नए मौके भी उपलब्ध करा रही हैं।

सैलरी पैकेज

दोस्तों आपको बता दें कि एक फुटवियर कंपनी (Footwear Company) में एकफुटवियर डिजाइनर का अहम रोल होता है। इसलिए वे सैलरी के लिए डील भी कर सकते हैं। हालांकि, शुरुआती दौर में डिजाइनर की सैलरी प्रतिमाह 15 से 20 हजार रुपये हो सकती है। इसके बाद आप अपने अनुभव के अनुसार खुद का फुटवियर लेबल स्थापित कर सकते हैं। चाहें तो, फुटवियर टेक्नीशियन, फुटवियर लाइन बिल्डर, ट्रेड एनालिस्ट, कॉस्ट एनालिस्ट, सीनियर प्रोडक्शन कोऑरडिनेटर या प्रोडक्शन मैनेजर के तौर पर भी काम कर सकते हैं। एक फुटवियर कंपनी में तीन तरह की प्रक्रिया से काम होता है। डिजाइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग और मार्केटिंग। अगर आप डिजाइनिंग के अलावा मैन्युफैक्चरिंग और मार्केटिंग में भी रूची रखते हैं तो आपको इस इंडस्ट्री में एक बड़ा मुकाम पाने से कोई नहीं रोकेगा।

4 thoughts on “फुटवियर डिजाइनर कैसे बनें? और फुटवियर (footwear) डिजाइनिंग कोर्स कैसे करें?”

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