फुटवियर डिजाइनर कैसे बनें?

हमारे पूर्वजों के जमाने में फुटवियर केवल लेदर यानी चमड़े से ही बनाए जाते थे, लेकिन बदलते समय के साथ Footwear  की दुनिया ने काफी तरक्की की।

प्लास्टिक, जूट, रबड,  कपड़े के  फुटवियर बनाए जाने  के बावजूद इंडस्ट्री लोगों की  मांग पूरी नहीं कर पा रही है। जिसके  कारण Footwear Designing क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं  100% हैं।

फुटवियर के क्षेत्र में कदम रखने के लिए कम से कम 12th पास होना चाहिए और कंप्यूटर की बेसिक जानकारी होना जरूरी है।

किसी भी विषय से इंटर पास छात्र footwear designing course  कर सकते हैं और फुटवियर डिजाइनर बन अपने लिए रोजगार का अवसर बना सकते हैं।

12th करने के बाद आप फुटवियर डिजाइनिंग के कोर्स में अंडर ग्रेजुएट, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स कर सकते हैं। यह कोर्स एक साल से लेकर तीन साल तक की होती हैं 

Footwear Designing Course के दौरान छात्रों को जूते बनाने वाले मैटीरियल, पैटर्न, डिजाइन कॉन्सेप्ट, डिजाइन सॉफ्टवेयर व फैशन टेंडस आदि की विस्तृत जानकारी दी जाती है।

अभ्यर्थी को बैचलर एवं मास्टर कोर्स  में प्रवेश के लिए ऑल इंडिया सलेक्शन टेस्ट (एआइएसटी) देना होगा। 

बैचलर प्रोगम में प्रवेश के लिए आयोजित टेस्ट में कुल 200 अंक के 150 प्रश्न पूछे जायेंगे। पेपर में चार सेक्शन होंगे

कई रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा ग्लोबल मंदी के बावजूद एफडीडीआई इंस्टीटयूट के स्टूडेंट्स को अच्छी कंपनियों में नौकरियां मिली हैं।

वैश्विक फुटवियर उत्पादन का 13 फीसदी भारत में होता है। भारत में चमड़े के करीब 90.9 करोड़ जोड़ी जूते और गैर चमड़े के करीब 105.6 करोड़ जूते सालाना बनते हैं। इसके अलावा 10 करोड़ चमड़े के जूते के टुकड़े तैयार किये जाते हैं

शुरुआती दौर में डिजाइनर की सैलरी प्रतिमाह 15 से 20 हजार रुपये हो सकती है। इसके बाद आप अपने अनुभव के अनुसार खुद का फुटवियर लेबल स्थापित कर सकते हैं।

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